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Monday, 18 January 2010

जागरूक बनिए स्वस्थ रहिये





मै स्वस्थ मेरा भारत स्वस्थ
मेरे प्यारे देशवासियों आप को नहीं लगता की हमे ना सिर्फ अपने लिए अपितु अपने प्यारे देश के लिए भी स्वस्थ रहना अत्यंत आवश्यक है ... हम किस बात का इंतज़ार कर रहे है ...क्यों ना हम भी इस मुहीम का हिस्सा बने और स्वस्थ रहे ।


स्वस्थ्य जीवन की दौलत आज हम सब की पहुँच से वैसे ही दूर होती जा रही है जैसे गरीबो की थाली से दो वक़्त की रोटी, दोष किसका है आपका, मेरा या उसका ..... सिर्फ़ हमारा और सिर्फ़ हमारा ... यह दौलत ना सिर्फ़ हमारे देश से जा रही है अपितु पूरा विश्व इसका शिकार है....
कुछ बातो पर ध्यान देना अब बहुत ही जरूरी हो गया है ...जीवन शैली में बदलाव - आज हमारी जीवन शैली कैसी है इसपर क्या चर्चा की जाये यह तो सर्वविदित है ... हम उसमे बदलाव करे यह अत्यंत आवश्यक है. १ ) सूर्योदय के साथ उठाना हमारी प्राचीन संस्कृति की अनमोल दें है, इसे हममे से अधिकतर लोग खो चुके है, और बाकी भी कुछ हद तक उसी राह पर है, परन्तु इसमें परिवर्तन करना हमारे लिए नितांत आवश्यक है ... इसका आनंद क्या होता है यह तो मै अनुभव नहीं करा सकता है इसके लिए तो आप को स्वास्थ्य के प्रति एक जागरूक राही बनना पड़ेगा . २ ) नियमित व्यायाम - एक सुसज्जित व्यायाम शाला के इंतज़ार में हम कब तक व्यायाम नहीं करेंगे ... कुछ ही मात्र में सही पर नियमित व्यायाम अत्यंत आवश्यक है, आखिर यह शरीर भी तो हमारा ही है .इस दिशा में योगा एक आसान रास्ता है जिसकी शिक्षा आज कल अत्यंत सुलभ भी है . वाहनों का कम से कम प्रयोग और सुबह की सैर अगर हम अपनी जीवन में और जोड़े तो यह हमारे शरीर के लिए अनमोल दें होगी .३ ) नियमित रूप से सुबह स्वल्पाहार के समय अगर हम अंकुरित दाल, चना, एवं कुछ मात्र में फल ले तो यह हमारे शरीर के लिए बहुत ही कारगर होगा . दोपहर में सादे भोजन साथ में कुछ हरा सलाद लेना चाहिए, शाम के समय हम सत्तू, भुने हुए चने और गुड इत्यादी ले सकते हे . रात्रि का भोजन शब्द हमे जीवन से निकालकर संध्या का भोजन करना होगा, संध्या काल में सदा भोजन कम तेल मिर्च मसाले वाला करना चाहिए. आज नियमित रूप से भोजन करे उससे भी कही ज़रूरी ही की नियत समय पर करे, और संतुलित करे .भोजन जितना जरूरी, उतना ही जरूरी है पानी नियमित रूप से ज्यादा से ज्यादा पानी पीना चाहिए यह हमारे शरीर के लिए अत्यंत जरूरी है .४ ) ना तो आप कुछ लेकर आये थे, ना आप कुछ लेकर जा पाएंगे फिर भी दौड़ना तो पड़ता ही है पर इसका मतलब यह नहीं है की हम अंधी दौड़ दौड़े .... बिना कार्य किये तो जीवन निर्वाह कोई नहीं कर सकता है, ना ही परिवार का भरण पोषण हो सकता है पर प्रयास करके कार्य के दौरान हंसमुख वातावरण बनाए रखना चाहिए और सदैव प्रसन्नचित रहकर कार्य करना चाहिए .... "मुस्कराहट एक सस्ती दावा है" .५ ) जिसने दिन भर हमारा साथ दिया, जिसकी बदौलत हम अपने परिवार का भरण पोषण करने में सक्षम होते है, वह हमारा प्यारा शरीर एक गहरी नींद चाहता है अतः उसे एक गहरी नींद दीजिये इससे आप के जीवन में ताजगी आएगी और आप अगली सुबह हल्का महसूस करेंगे.यह सब उतना कठिन नहीं है जितना की महसूस होता है या कह सकते है की जितना हमने इसे बना रखा है .हमारे शरीर के प्रति जिस दिन हमारी चेतना जाग जाएगी वो दिन हमारे लिए अनमोल होगा, हम जानते है की थोड़े से प्रयास से हम भी स्वस्थ्य और प्रसन्न रह सकते है ,तो फिर देर किस बात की शुरू करते है एक मुहीम: हम स्वस्थ्य सुन्दर हमारा भारत.जय हिंद

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