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Saturday, 13 March 2010

स्ट्रेस

स्ट्रेस
स्ट्रेस आज के युग का हमारा सबसे प्यारा दोस्त जिसे हम सब हर दम अपने सीने से लगाये घूमते है... हां लेकिन जैसे कई शब्द जुड़कर उसका रूप जरूर बदल सकते है... पर हमसे उसकी यारी छोड़ी नहीं जाती...
क्या स्ट्रेस के साथ जीवन जीना हम सीखते जा रहे हैकी हमारी दौलत, की दीमक बन चुके धरती के भगवान डॉक्टर की ज़रुरत है हमे....
सोचना तो पड़ेगा क्यों की अब तक नहीं सोचा है....
आज ही कुछ समय निकाल कर इस पर भी विचार कर लीजिये... क्या पता इसी की वजह से कल हो ना हो ....
हम आगे भी इसी विषय के साथ कुछ पल एक दूसरे के साथ बितायेगे तब तक आप विचार कीजिये ....
आप का मित्र

1 comment:

  1. सारे सुकून ख़त्म कर डाले कृत्रिम गतिविधियों ने.......सोचना क्या, एक गंभीर विस्फोट के बाद ही अब कोई परिवर्तन होगा

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