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Tuesday, 27 July 2010


पर
तू क्यों गया........







आज वक़्त ने फिर उस लम्हे को नजरो के सामने ला दिया है ....
आज फिर उसकी याद सता रही है....
यू तो पांच साल गुज़ार दिए उसके बिना फिर भी दिल उसी का इंतज़ार करता है....
तुझे मै अपने से जुदा नहीं कर पाया , हर दिन हर पल तुझे अपने ही करीब पाया ... पर तू क्यों गया ... पर तू क्यों गया .... पर तू क्यों गया....

" तुझे मै क्या कहूँ .. दोस्त कहूँ ...की साया कहूँ ....
एक दोस्त था तू मेरा जो साए की तरह मेरे साथ रहता था....
आज साया है तेरा जो दोस्त बनकर मेरे साथ है "

आज वक़्त ने फिर उस लम्हे को नज़रो के सामने ला दिया है .....
आज फिर उसकी याद सता रही है......






" मै हर पल तेरे साथ हूँ नितिन "

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