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Saturday, 12 March 2011

तन्हाई

आंसू है की गिरते नहीं , दर्द है की रुकता नहीं !!
महफ़िल के बीच में भी तनहा हूँ , की अपना कोई मिलता नहीं !!
आदत ना रही बयां करने की , और हाले दिल पूछना आदत भी नहीं उनकी !!
बीच बाज़ार का चौराहा हूँ मै , पर यहाँ अपना कोई नहीं !!
सब अपनी मंजिल कि राह में चले जा रहे है , पर इसके आगे मेरी कोई मंजिल नहीं !! 

1 comment:

  1. sabki apni apni majil hoti hai..
    jab dil tanha hota hai tab bhi bahut kuch sochta hai..tanha kahan rahta hai..
    bahut badiya ..

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