
वक़्त गुज़रता जाता है, ना तो कभी रुका है, ना कभी रुकेगा , ना कोई रोक पाया है ना कोई रोक पायेगा ...
आप खुश है या दुखी है उससे फर्क नहीं पड़ता, समय चक्र चलता रहता है ...
शायद इसी लिए हर गम ख़ुशी में और हर ख़ुशी गम में बदल जाती है ...
माना की रुकने की उसकी फितरत नहीं ....
पर दिल में सजाये रखना हमारी आदत है ...
वो लम्हे आज भी दिल में ज्यो के त्यों है ...
वो यादे भी वैसी की वैसी ही है ...
वो छोड़ कर चले गए हमे ...
पर ये आँखे उन्हें आज भी ढूंढती है ...
क्यों होता है ऐसा; की दिल के एक कोने में एक चिराग जलता रहता है, और उसकी रौशनी में हम हर अच्छे बुरे दिन देख लेते है ....काश इस तस्वीर की तरह वो चिराग भी ठंडा पड़ जाता और वो यादे भी और वो लम्हे भी ... पर यह तस्वीर भी झूठी है, और ऐसी सोच भी .....
हर पल को जी भरकर जियो ....
शुभरात्रि ....
यही यादें तो हमारे जीवन का खुशनुमा पल होती हैं
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