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Saturday, 23 January 2010

कद्रदान बनो .


क्या कहूँ उस कलाकार को ...क्या ना कह दूँ , उस कलाकार को जिसने इतनी खूबसूरत सी पेंटिंग बनाई है।
आज मेरे एक प्रिय मित्र ने मुझे ईमान मेलिकी की कुछ खूबसूरत पेंटिंग्स का संग्रह मेल किया मुझे उन पेंटिंग्स को देख कर सबसे पहले तो यह लगा की ईश्वर का बंदा यह इंसान कितना खुबसूरत है, वाह रे कलाकार वाह कितनी प्यारी है तेरी सोच और कितने सधे है तेरे हाथ जो दिमाग की हलचल को कागज़ पर उतार देते है .... कैसे होता है यह सब क्या इसी को हम लगन कहते है ... क्या यही जूनून कहलाता है ... प्रिय मित्रो कितना अच्छा लगता है जब कोई अपनी दिल की ख्वाइश को पूरा कर लेता है ... पर यह जरूरी नहीं की उस व्यक्ति विशेष को भी उतना ही आनंद मिले या उतना ही अच्छा लगे हर कलाकार को पता होता है की उसकी मंजिल अभी अधूरी है और यही सोच उसकी राह में सफलताए जोडती जाती है ... और हमे आश्चर्य चकित भी कर जाती है ... यह अहसास भी हमे होता है की कितने अधूरे है हम और कितनी दूर है हमारी मंजिल ... सदा ऐसे ही लोग हमारी जीवन यात्रा में हमे मिलते रहे, और हर दम हममे एक उत्साह भरा रहे ...हम उतना ना सही पर अगर उनकी सोच उनकी मेहनत की क़द्र भी कर पाए तो भी ,हमारा जीवन सफल हो सकता है . मन की सुन्दरता को बनाये रखिये , कद्रदान बनिए , दुनिया खुदबखुद सुन्दर लगने लगेगी ....

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