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Friday, 9 April 2010

एक सवाल मै करूँ एक सवाल तुम करो ...


हर दिन एक चुनौती होता जा रहा है उसके लिए भी जिसने कुछ पाया है और उसके लिए भी जिसे कुछ पाना है ... प्रिय मित्रो वैसे तो कई अच्छे अच्छे सन्देश हमे रोज़ मोबाइल में मिलते ही रहते है हम भी उन्हें पढ़ कर अलविदा कह देते है ... क्या कभी हम उन्हें पढने के बाद, उसकी कुछ अच्छी बातो को अपनाने के लिए भी प्रयास करते है ... अगर हम गलत ना हो तो शायद -१० % ही ऐसे लोग होंगे जिन्हें वो सन्देश याद रखने की आदत होती है, बाकि ९०-९५% तो बस यह सोच कर ही सन्देश को मिटा देते है की हमे मालूम है.....
आज भी मुझे एक अच्छा सन्देश मिला जिसे मै बताना चाहूँगा " इंसान से प्यार करो वस्तु से नहीं ... पर इंसान वस्तु से प्यार करता है इंसान से नहीं ... इंसानियत के लिए दौड़ो वस्तु के लिए नहीं ... पर इंसान इंसानियत छोड़ कर वस्तु के पीछे भाग रहा है "
यह कोई ऐसा अनोखा सन्देश नहीं था, ऐसे ही अनेको सन्देश हम सभी के मोबाइल से रोज़ रोज़ गुजरते है पर हमारी पुरानी आदत पढो मिटाओ, पढो मिटाओ कही ऐसा ना हो की कोई गरमा गरम सन्देश आये और मोबाइल कहे नो स्पेस ....
क्या यह सब सही हो रहा है अगर हमारी पीढ़ी इस बिमारी से नहीं बच पायी तो हमारी अगली पीढ़ी तो जनम से ही बीमार होगी .....
आज लोगो को ना तो ज्यादा सवाल पसंद है, ना ही ज्यादा जवाब देना पसंद है ...
क्यों ... पता नहीं ... शायद वो सब जानते है और उन्हें पसंद नहीं की कोई उन्हें कुछ पूछे या बताये .... या शायद इसी को सभ्यता का विकास कहते है ... माँ बाप बड़े बूढों का लिहाज़ आये ना आये, कोई बात नहीं अंग्रेजी बोलनी जाये तो फिर क्या बात है ... हो गए आप नंबर वन
जैसे एक घास की कभी भी पेड़ से तुलना नहीं की जा सकती, वैसे ही युवा की कभी भी प्रौढ़ से तुलना नहीं की जा सकती है, घास चाहे तो पेड़ की छाव में फले फूले या फिर धूप में सूख जाये यह तो उसका ही निर्णय है......
प्रिय मित्रो जीवन की कश्मकश में भागते भागते कही इतनी दूर मत निकल जाना की लौटने की राह मुश्किल हो जाये ...
अपने हस्ताक्षर को ऑटो ग्राफ में बदलने की दौड़ आँखे खोल कर दौडिए अंधे होकर नहीं ...
आप का साथी ....
अमित

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