
बचपन का ज़माना
बचपन का ज़माना होता था, खुशियों का खज़ाना होता था !!
चाहत चाँद को पाने की, दिल तितली का दीवाना होता था !!
खबर ना थी कुछ सुबह की , ना शाम का ठिकाना होता था !!
थक हार के आना स्कूल से, पर खेलने भी जाना होता था !!
दादी की कहानी होती थी , परियो का फसाना होता था !!
बारिश में कागज़ की कश्ती थी , हर मौसम सुहाना होता था !!
हर खेल में साथी होते थे , हर रिश्ता निभाना होता था!!
पापा की वो डाटें ,गलती पर मम्मी का मनाना होता था !!
गम की जुबां ना होती थी , ना ज़ख्मो का पैमाना होता था !!
रोने की वजह ना होती थी ना हंसने का बहाना होता था !!
अब नहीं रही वो जिंदिगी , जैसा बचपन का ज़माना होता था!!
amit ji yah rachna vatvriksh ke liye bhejiye parichay aur tasweer ke saath rasprabha@gmail.com per
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