
किससे कहूँ ...कौन है अपना ... कौन है वो हमदर्द जिससे बयां कर सकूँ यह सारी दास्ताँ ....
वो हँसता है मेरी बाते सुनकर , वो मजाक भी उडाता है मेरा, वो समझाता भी है मुझे, वो मनाता भी है मुझे॥
वो दोस्त है मेरा ......
संबंधो की डोरी से तो नहीं बंधा है वो , ना ही एक जात, पात, धर्म के है हम पर फिर भी सब से प्यारा है वो, सुख में साथ देती है सारी दुनिया पर दुःख का सहारा है वो ॥
वो दोस्त है मेरा ......
स्कूल के पन्नो से जीवन की सच्चाई तक चला है मेरे साथ , हर कठिन रास्ते में उसका हाँथ था मेरे हाँथ, सबने जबठुकराया तब वो था मेरे साथ ॥
वो दोस्त है मेरा ......
खुले आसमान में तारों की चादर ओढ़कर साथ सोये थे हम , सपनो की दुनिया में भी एक साथ खोये थे हम , पल भर कीजुदाई में भी रोये थे हम ॥
वो दोस्त है मेरा ......
गाँव की पगडण्डी , नदी का किनारा , पहाड़ो की हवाएं, हसीन वादियों का नज़ारा ...... सब बेकार है जब दोस्त साथ ना हो हमारा .... जब दोस्त साथ ना हो हमारा .....
संबंधो की डोरी से तो नहीं बंधा है वो , ना ही एक जात, पात, धर्म के है हम पर फिर भी सब से प्यारा है वो, सुख में साथ देती है सारी दुनिया पर दुःख का सहारा है वो ॥
ReplyDeleteवो दोस्त है मेरा ......
bahut khoob
... behatreen !!!
ReplyDeleteसंबंधो की डोरी से तो नहीं बंधा है वो , ना ही एक जात, पात, धर्म के है हम पर फिर भी सब से प्यारा है वो, सुख में साथ देती है सारी दुनिया पर दुःख का सहारा है वो ॥
ReplyDeleteवो दोस्त है मेरा ......
kitne kmaal ki ....aur arthpoorn panktiyan hain...