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Saturday, 20 November 2010

वो दोस्त है मेरा








किससे
कहूँ ...कौन है अपना ... कौन है वो हमदर्द जिससे बयां कर सकूँ यह सारी दास्ताँ ....



वो हँसता है मेरी बाते सुनकर , वो मजाक भी उडाता है मेरा, वो समझाता भी है मुझे, वो मनाता भी है मुझे॥
वो दोस्त है मेरा ......

संबंधो की डोरी से तो नहीं बंधा है वो , ना ही एक जात, पात, धर्म के है हम पर फिर भी सब से प्यारा है वो, सुख में साथ देती है सारी दुनिया पर दुःख का सहारा है वो ॥
वो दोस्त है मेरा ......

स्कूल के पन्नो से जीवन की सच्चाई तक चला है मेरे साथ , हर कठिन रास्ते में उसका हाँथ था मेरे हाँथ, सबने जबठुकराया तब वो था मेरे साथ ॥
वो दोस्त है मेरा ......

खुले आसमान में तारों की चादर ओढ़कर साथ सोये थे हम , सपनो की दुनिया में भी एक साथ खोये थे हम , पल भर कीजुदाई में भी रोये थे हम ॥
वो दोस्त है मेरा ......

गाँव की पगडण्डी , नदी का किनारा , पहाड़ो की हवाएं, हसीन वादियों का नज़ारा ...... सब बेकार है जब दोस्त साथ ना हो हमारा .... जब दोस्त साथ ना हो हमारा .....



3 comments:

  1. संबंधो की डोरी से तो नहीं बंधा है वो , ना ही एक जात, पात, धर्म के है हम पर फिर भी सब से प्यारा है वो, सुख में साथ देती है सारी दुनिया पर दुःख का सहारा है वो ॥
    वो दोस्त है मेरा ......
    bahut khoob

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  2. संबंधो की डोरी से तो नहीं बंधा है वो , ना ही एक जात, पात, धर्म के है हम पर फिर भी सब से प्यारा है वो, सुख में साथ देती है सारी दुनिया पर दुःख का सहारा है वो ॥
    वो दोस्त है मेरा ......

    kitne kmaal ki ....aur arthpoorn panktiyan hain...

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