Search This Blog

Wednesday, 23 December 2009

दिल ढूंढता है फिर वही ......

दिल ढूंढता है फिर वही फुर्सत के रात दिन .... क्या बढती हुई उम्र के साथ यह गाना आप को भी राहत देता है... क्या आप भी उन खोये हुए पलों में जीना चाहते है... क्या आप भी अकेले में उन्ही लम्हों में जीते है जो अब हमारी जिंदिगी से जा चुके है... हो सकता है हां हो सकता है ना ... पर ना जाने क्यों मेरा दिल कहता है चाहे हम हर रोज़ एक नयी मंजिल को भी छु ले पर कह न कही दिल के एक कोने में एक चिराग जलता रहता है... जो कहता है " दिल ढूंढता है फिर वही ...."
मुझे याद तो नहीं आ रहा है की इस सुन्दर से गीत को लिखने वाले .... अहसास को कागज़ पर उतरने वाले ... महान व्यक्ति कौन है... पर उन्हें मेरा सदा सलाम...

पीछे मुड़कर मत देखो आगे की रंगीन ज़मीन इंतज़ार कर रही है.... इसी दौड़ में खो कर रह गयी है हमारी पीढ़ी ... आप को आने वाले हर पल की ढेरो शुभकामनाये ...

दिल ढूंढता है फिर वही फुर्सत के रात दिन.......

No comments:

Post a Comment