इन्ही दो शब्दों में खो गए है हम..... अब हमे
"हम" शब्द से ज्यादा "मै" प्यारा है .... तुमसे ज्यादा हमारे प्यारे है....ऐसा क्यूं.... यही दस्तूर हो गया है इस ज़माने का .... यह ही वो ज़माना है जिसकी शोभा बढ़ाते है हम और तुम......
यह अगर किसी और देश मै हुआ होता तो कोई आश्चर्य की बात नहीं थी पर देखिये न यह हमारे देश भारत में हो रहा है एक ऐसा देश जिसमे एक दूसरे के लिए मर मिटने की भावना हुआ करती थी ... अतिथि सत्कार जो हम सिखाते थे ; आज लगता है हमे ही सीखना पड़ेगा....और भी न जाने क्या क्या आने वाला वक़्त हमे सिखाएगा .....उसे भी देखेंगे हम और तुम... क्या उसके लिए भी हम तैयार है जब हम फिर से गुलाम होंगे फिर हमे होह्ताज़ रहना पड़ेगा ... पर इसबार ब्रिटिश हम पर राज नहीं करेंगे ... राज करेंगे हमारे अपने वो अपना आप का भाई भी हो सकता है या आप का पिता, बेटा, बेटी, दोस्त, पति या पत्नी भी... तो तैयार हो जाओ ....... क्यों की अब वो "हम" पर विश्वास नहीं करते हमे तो "मै" तक ही सीमित रहना प्यारा लगता है....
No comments:
Post a Comment